भारत और भूटान ने ऊर्जा क्षेत्र में आपसी साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने का संकल्प लिया है। नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों देशों के मंत्रियों ने ऊर्जा और विद्युत क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। इस आधिकारिक बैठक का उद्देश्य दोनों पड़ोसी देशों के बीच पारंपरिक संबंधों को ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर और आगे बढ़ाना है।
विद्युत मंत्रियों की द्विपक्षीय बैठक और प्रमुख चर्चाएं
केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल और भूटान के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योनपो जेम छेरिंग के बीच यह महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने वर्तमान में चल रहे द्विपक्षीय सहयोग की गहन समीक्षा की। चर्चा के प्रमुख विषयों में जलविद्युत विकास, सीमा पार विद्युत व्यापार, पारेषण संपर्क (ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी), नवीकरणीय ऊर्जा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल रहे। दोनों पक्षों ने माना कि सतत विकास और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए यह ऊर्जा साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जलविद्युत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा
बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने भारत और भूटान के बीच चल रही प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं के अब तक के कामकाज का जायजा लिया। समीक्षा की गई परियोजनाओं में मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल थीं:
- पुनात्सांगछू-एक जलविद्युत परियोजना
- पुनात्सांगछू-दो जलविद्युत परियोजना
- संकोश जलविद्युत परियोजना
- चुखा जलविद्युत परियोजना
सहयोग को निरंतर बनाए रखने का संकल्प
दोनों मंत्रियों ने भविष्य में भी आपसी संवाद और समन्वय को निरंतर बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस उच्चस्तरीय संवाद के माध्यम से भारत-भूटान ऊर्जा साझेदारी को नई ऊंचाइयां मिलने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक और तकनीकी हित पोषित होंगे।
प्राथमिक स्रोत: यह स्वतंत्र समाचार-सार Akashvani News की आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। पूरी जानकारी के लिए मूल दस्तावेज पढ़ें।



