ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना 2.0 की प्रगति का आकलन किया। इस समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण और रोजगार सृजन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना था। बैठक में यह रेखांकित किया गया कि निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को इसका लाभ मिल सके।
डिजिटल सुधार और वास्तविक समय निगरानी पर जोर
समीक्षा के दौरान स्वीकृत परियोजनाओं के तेजी से कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके लिए प्रशिक्षण बैचों के समय पर संचालन को अनिवार्य बनाने की बात कही गई। इसके अलावा, कार्यक्रम के प्रदर्शन की वास्तविक समय पर और विस्तृत निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उन्नत डैशबोर्ड तथा विश्लेषणात्मक रिपोर्टों के विकास पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। डिजिटल माध्यमों के प्रयोग से प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता में सुधार लाने की योजना है।
योजना के अब तक के आंकड़े
ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस योजना की शुरुआत वित्त वर्ष 2014-15 में की गई थी। तब से लेकर अब तक इस पहल के माध्यम से निम्नलिखित उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं:
- देशभर में कुल 18 लाख 45 हजार ग्रामीण गरीब युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
- विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में लगभग 12 लाख 35 हजार प्रशिक्षित उम्मीदवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
भविष्य की रणनीतियां और लक्ष्य
सरकार ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बैठक में चर्चा किए गए सुधारों का उद्देश्य प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ाना और रोजगार की संभावनाओं को और अधिक सुदृढ़ करना है। उन्नत तकनीकों और डैशबोर्ड के इस्तेमाल से अधिकारियों को क्षेत्रीय स्तर पर आ रही बाधाओं को तुरंत दूर करने में मदद मिलेगी।
प्राथमिक स्रोत: यह स्वतंत्र समाचार-सार Akashvani News की आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। पूरी जानकारी के लिए मूल दस्तावेज पढ़ें।



