रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया है कि अहिंसा और शांति भारतीय संस्कृति का मूल हिस्सा हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि किसी को भी देश की इस मूल भावना को उसकी कमजोरी मानने की भूल नहीं करनी चाहिए।
राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करना सरकार का सबसे अहम दायित्व है। देश की गरिमा और सम्मान बनाए रखने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
जैन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
श्री सिंह ने जैन धर्म को भारतीय सभ्यता और संस्कृति का गौरव करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार देश की प्राचीन जैन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
प्राचीन मूर्तियों की स्वदेश वापसी
सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान विदेशों से भगवान तीर्थंकर की चोरी हुई 20 से अधिक प्राचीन और अमूल्य प्रतिमाओं को सफलतापूर्वक भारत वापस लाया गया है। सरकार सांस्कृतिक धरोहरों के पुनरुद्धार के लिए लगातार प्रयासरत है।
प्रमुख बिंदु
- अहिंसा और शांति को भारत की सांस्कृतिक पहचान बताया गया।
- देश की संप्रभुता और सुरक्षा को सरकार का सर्वोच्च कर्तव्य बताया गया।
- विदेशों से भगवान तीर्थंकर की 20 से अधिक प्राचीन प्रतिमाएं भारत लाई गईं।
प्राथमिक स्रोत: यह स्वतंत्र समाचार-सार Akashvani News की आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। पूरी जानकारी के लिए मूल दस्तावेज पढ़ें।



