प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी, सुरक्षा और विदेश मामलों तथा शासन से जुड़े विभागों के भविष्य के कार्य एजेंडे पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में मंत्रिमंडल सचिव, प्रमुख मंत्रालयों के सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने क्षेत्रीय अनुभवों और कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों को साझा किया।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण और डेटा उपयोग पर जोर
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे देश के भविष्य को आकार देने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ विचार करें। उन्होंने डेटा को एक राष्ट्रीय संपत्ति और भविष्य का संसाधन बताते हुए इसके प्रभावी उपयोग और बेहतर अंतर-संचालनीयता पर बल दिया। इसके अलावा, उन्होंने संगठनात्मक और मानसिक बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए अधिकारियों से अपनेपन की भावना के साथ काम करने का आग्रह किया।
नीति निर्माण में युवाओं की भागीदारी और रक्षा क्षेत्र
अधिकारियों के बीच टीम भावना और अनौपचारिक बातचीत के महत्व को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने नीति निर्माण में नए दृष्टिकोण शामिल करने के लिए सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच जुड़ाव बढ़ाने की बात कही। उन्होंने देश के रक्षा उद्योग को और अधिक मजबूत तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया संकट के अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के समन्वय तंत्र को सरकारी कार्य संस्कृति का स्वाभाविक हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सामूहिक दृष्टिकोण
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने मानव हस्तक्षेप को सुनिश्चित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी उपयोग का आह्वान किया और मानवीय विशेषज्ञता के साथ इसके तालमेल के नए तरीके तलाशने को कहा। अंत में, उन्होंने जटिल चुनौतियों का समाधान करने और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ भारत के भविष्य को आकार देने के लिए संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण, बेहतर तालमेल और सामूहिक स्वामित्व की आवश्यकता को दोहराया।
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