भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने राष्ट्रीय राजधानी स्थित उच्चतम न्यायालय परिसर में दिव्यांगजनों के लिए एक विशेष संवाद कार्यक्रम की मेजबानी की। स्वतंत्रता दिवस समारोह की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले दिव्यांगजनों के अनुभवों को सुनना और उनके योगदान को सम्मानित करना था।
विविध क्षेत्रों के विशिष्ट जनों की सहभागिता
इस विशेष आयोजन में देश के विभिन्न कोनों और क्षेत्रों से आए दिव्यांगजनों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख हस्तियों में पैरालंपियन खिलाड़ी, सिविल सेवा के अधिकारी, शिक्षाविद और उद्यमी शामिल थे। इन सभी ने अपने जीवन के संघर्षों, बाधाओं को पार करने और अपने करियर में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करने की अपनी प्रेरक कहानियों को साझा किया।
मुख्य न्यायाधीश द्वारा सराहना और प्रोत्साहन
कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सभी उपस्थित लोगों की व्यक्तिगत यात्रा को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने दिव्यांगजनों के दृढ़ संकल्प की सराहना करते हुए समाज के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान की भरपूर प्रशंसा की। इस पहल के तहत निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल रहे:
- पैरालंपिक खेल जगत के खिलाड़ी
- लोक सेवा एवं प्रशासनिक अधिकारी
- शिक्षा जगत के विद्वान एवं academicians
- विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों के उद्यमी
समावेशी समाज की दिशा में कदम
इस अनूठी पहल ने उच्चतम न्यायालय परिसर में एक सकारात्मक और समावेशी वातावरण को प्रस्तुत किया। विभिन्न पृष्ठिभूमियों से आए इन achievers ने यह साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प के बल पर हर प्रकार की कठिनाई को पार किया जा सकता है। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों की हौसला अफजाई के साथ हुआ।
प्राथमिक स्रोत: यह स्वतंत्र समाचार-सार Akashvani News की आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। पूरी जानकारी के लिए मूल दस्तावेज पढ़ें।



