संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में आधुनिक तकनीक के आने से कामकाज की गति में उल्लेखनीय तेजी आई है और व्यवस्था पूरी तरह कागज-मुक्त हो गई है। यह जानकारी राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश ने दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन के सभी सदस्यों को डिजिटल उपकरण मुहैया कराए गए हैं, जिससे विधायी कार्यों को संचालित करने में पारदर्शिता और सुगमता दोनों बढ़ी हैं।
प्रारंभ कार्यशाला का समापन और उद्देश्य
यह बात उपसभापति ने नवनिर्वाचित सदस्यों के वास्ते आयोजित दो दिवसीय विशेष ‘प्रारंभ’ कार्यशाला के समापन सत्र के दौरान अपने संबोधन में कही। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नए सदस्यों को उच्च सदन के नियमों, स्थापित परंपराओं, कार्यप्रणालियों और सदन के रीति-रिवाजों से भली-भांति अवगत कराना था, ताकि वे सदन के भीतर अपनी विधायी भूमिका का निर्वहन प्रभावी ढंग से कर सकें।
संसदीय शिक्षा और निरंतर आत्म-सुधार
उपसभापति ने रेखांकित किया कि जनप्रतिनिधियों का यह अधिगम या सीखना केवल इस कार्यशाला तक सीमित नहीं रहता है। उनके अनुसार, यह आयोजन वस्तुतः आत्म-सुधार की एक ऐसी अनवरत प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण मात्र है जो आगे भी जारी रहती है।
सक्रिय भागीदारी पर सराहना
इस अवसर पर उन्होंने नवनिर्वाचित सदस्यों द्वारा कार्यशाला में दिखाई गई सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। साथ ही, यह उम्मीद जताई कि इस सत्र के माध्यम से सदस्यों को संसदीय कार्यप्रणाली की बारीकियों और राज्यसभा सचिवालय के विविध पहलुओं को समझने में काफी सहायता मिली होगी।
मुख्य बिंदु
- आधुनिक तकनीक के प्रयोग से राज्यसभा की कार्यवाही हुई कागज-मुक्त और तीव्र।
- सभी माननीय सदस्यों को दिए गए आवश्यक डिजिटल उपकरण।
- नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए दो दिवसीय ‘प्रारंभ’ कार्यशाला का समापन।
- संसदीय नियमों और परंपराओं से नए सदस्यों को कराया गया परिचित।
प्राथमिक स्रोत: यह स्वतंत्र समाचार-सार Akashvani News की आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। पूरी जानकारी के लिए मूल दस्तावेज पढ़ें।



