संसद ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। राज्यसभा द्वारा इस विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद यह प्रक्रिया पूरी हुई, जबकि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी थी। इस नए विधायी कदम का उद्देश्य देश भर में आयोजित होने वाली सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
सख्त सजा और जुर्माने के प्रावधान
चर्चा का जवाब देते हुए कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन को अवगत कराया कि सरकार परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों को लेकर पूरी तरह सख्त रुख अपना रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानून के अंतर्गत दोषियों के लिए कड़े दंड तय किए गए हैं:
- दोषियों के लिए दस साल तक की कैद का प्रावधान।
- दस करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने की व्यवस्था।
- दोषियों की संपत्ति कुर्क या जब्त किए जाने का नियम।
- मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना और तीन महीने में मुकदमे का निपटारा।
संसदीय चर्चा और विभिन्न दलों के विचार
इस विधेयक पर हुई बहस के दौरान पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने विचार रखे। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने जानकारी दी कि कांग्रेस पार्टी इस विधेयक का समर्थन करती है, हालांकि उन्होंने इसमें और अधिक प्रभावी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता जताई। इसके अतिरिक्त, सत्ता पक्ष और अन्य दलों के सदस्यों ने भी चर्चा में हिस्सा लिया, जिसमें विशेष अदालतों और कार्यबल के गठन का समर्थन किया गया, जबकि कुछ सदस्यों ने अन्य शैक्षणिक मुद्दों को भी उठाया।
सरकार का पक्ष और भविष्य की रूपरेखा
चर्चा के दौरान सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि देश में शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभाव और चिकित्सा संस्थानों की संख्या में हुई वृद्धि का हवाला देते हुए यह कहा गया कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना सर्वोपरि है। सभी संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के पश्चात राज्यसभा ने इस संशोधन विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
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